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13/11/2017

हमारे जीवन पर Body Language का क्या प्रभाव पड़ता है जानिये

मौजूदा कॉर्पोरेट इंडिया को सिर्फ डिग्रियों से लैस एंप्लॉइज की तलाश नहीं होती, बल्कि यह जमाना स्मार्ट एंप्लॉई का है। स्मार्टनेस से मतलब ऐसे एंप्लॉई से है, जिसमें प्रफेशनल क्वॉलिफिकेशन तो हो ही, साथ ही वह सॉफ्ट स्किल्स से भी भरपूर हो। अगर आप भी स्कूल में अपनी Body Language पर खासा ध्यान देते हैं, तो आपकी यह कुशलता आपको बाकी लोगों से अलग बनाएगी।

Best body language tips in hindi

अगर आप किसी व्यक्ति से फोन पर बात करें और उसी व्यक्ति से आमने-सामने बात करें, तो दोनों स्थितियों के नतीजों में जमीन-आसमान का अंतर हो सकता है। इसके पीछे है दोनों व्यक्तियों की Body Language। दरअसल, Body Language का प्रभाव हमारे जीवन के हर पल पर पड़ता है, भले ही हम इसे महसूस करें या नहीं? करियर में आगे बढ़ने के लिए भी जितनी जरूरी अच्छी परफॉर्मेंस है, उतना ही जरूरी है अपनी Body Language पर ध्यान देना।

इसके अलावा, अगर आपके अंदर अन्य लोगों की Body Language पढ़ने का भी हुनर है, तो यह बात सोने पर सुहागा साबित होगी। अगर आप सेल्स के फील्ड में हैं, तो Body Language समझने की कला आपके करियर को आगे बढ़ाने में बहुत मददगार साबित हो सकती है। आपको अपने संभावित ग्राहक की Body Language देखकर ही पता चल जाएगा कि वह व्यक्ति आपके प्रॉडक्ट में दिलचस्पी ले भी रहा है या नहीं?
हमारा दिमाग लगभग हर बॉडी पॉस्चर से निकलने वाले संकेत को समझ सकता है। सही Body Language को सीखना फॉरन लैंग्वेज सीखने जैसा है। हमें रोजमर्रा की आदतों में कुछ बेसिक पॉस्चर्स पर ध्यान देना चाहिए, जैसे : हमेशा आई कॉन्टैक्ट रखकर बात करना, थोड़ी-सी मुस्कान का महत्व जानना, हाथ बांधकर बातें करने से बचना, खुली हथेलियां गंभीरता और रेसेप्टिविटी को दर्शाती हैं, हाथ हिलाकर बातचीत करने से समझा जाता है कि आप बड़ी रुचि से बातें कर रहे हैं, जबकि मुंह के ऊपर या चेहरे पर हाथ रखना नेगेटिव Body Language का हिस्सा है। आपके रिलेक्स्ड पॉस्चर का मतलब होगा कि आप कम्युनिकेशन के लिए तैयार हैं। स्कूल में कभी भी किसी भी स्तर के व्यक्ति से ऊंची आवाज और तेज स्पीड में बात नहीं करनी चाहिए। इससे आप अपने व्यक्तित्व की गंभीरता खो देंगे।

चाहे आप स्कूल में अपने कलीग्स से बातचीत करें या फिर अपनी डेस्क पर काम कर रहे हों, हमेशा अपनी Body Language पर ध्यान दें। कम शब्दों में हम कह सकते हैं कि Body Language एक ऐसा हुनर है, जिसे हम अपने मूवमेंट्स, पॉश्चर्स और वॉयस टोन से हासिल करते हैं।

Body Language पढ़ें

स्कूल में किसी भी व्यक्ति से बात करते समय शब्दों के अलावा सामने वाले की Body Language पढ़ने की भी कोशिश करनी चाहिए। खुद को सामने वाले के साथ इस तरह रिलेट करना बेहद जरूरी है। इससे आपको यह पता चल सकेगा कि वह व्यक्ति आपकी बातों में दिलचस्पी ले भी रहा है या नहीं? अगर कोई शुरुआत में तो आई कॉन्टैक्ट रखकर बातें कर रहा है, लेकिन धीरे-धीरे आंखें बचाने लगता है, तो इसका मतलब है कि वह बातचीत में दिलचस्पी खो रहा है। ऐसे ढेरों संकेत आपको सचेत कर सकते हैं। इसके बाद आपको अपनी अप्रोच बदल देनी चाहिए। अगर आप टीचर के साथ बातें कर रहे हैं या कोई सवाल पूछ रहे हैं, तो अक्सर Body Language पढ़ने से ही आपको अपने ज्यादातर जवाब मिल जाते हैं। अगर किसी व्यक्ति की जुबान कुछ और कह रही है और Body Language कुछ और, तो उसकी बॉडी पर भरोसा कीजिए।

अकेले में प्रैक्टिस करें

अगर आप अपनी Body Language से संतुष्ट नहीं हैं, तो घर पर शीशे के सामने इसे सुधारने की कोशिश करनी चाहिए। ध्यान रखें कि आपकी Body Language भी वही बोले, जो आप मुंह से बोल रहे हैं। महत्वपूर्ण यह नहीं है कि आप क्या कहते हैं, बल्कि यह है कि आप इसे किस तरह कहते हैं? हमेशा मुस्कराते रहें। जो लोग अपने बारे में अच्छा सोचते हैं, उनकी Body Language अक्सर बेहतर होती है।

कुछ खास बातें

वैसे तो Body Language पर बरसों से रिसर्च की जा रही है। अलग-अलग लोगों ने पॉजिटिव Body Language के बारे में कई बातें बताई हैं, जिन्हें एक आर्टिकल में समेट पाना मुश्किल है। फिर भी मोटे तौर पर कुछ बातों का हमेशा ध्यान रखना चाहिए, जिससे स्कूल में आपकी इमेज एक अच्छे वर्कर की बन सके। चाहे टीचर हो या कलीग हमेशा आई कॉन्टैक्ट रखकर बातें करें, खुली हथेलियां गंभीरता और रेसेप्टिविटी को दर्शाती हैं, करीब रहकर बात करना यानी इंटरेस्ट लेना और दूर होने का मतलब है बातचीत में ध्यान नहीं होना, रिलेक्स्ड पॉस्चर का मतलब होगा कि आप कम्युनिकेशन के लिए तैयार हैं। स्कूल में हाथ बांधकर खड़ा नहीं होना चाहिए, यह डिफेंसिवनेस और विरोध का संकेत है। हाथ हिलाकर बातचीत करने से समझा जाता है कि आप बड़ी रुचि से बातें कर रहे हैं। मुंह के ऊपर या चेहरे पर हाथ रखना नेगेटिव Body Language का हिस्सा है। स्कूल में कभी भी किसी भी स्तर के व्यक्ति से ऊंची आवाज और तेज स्पीड में बात नहीं करनी चाहिए। इससे आप अपने व्यक्तित्व की गंभीरता खो देंगे।
तो, फिर जुट जाइए मिशन Body Language में। यकीन जानिए, करियर में जितनी महत्वपूर्ण जगह आप अपने काम से बनाएंगे है, उतने ही महत्वपूर्ण आप पॉजिटिव Body Language को अपनाकर भी बन सकेंगे।

आत्मविश्वास कैसे बढाएं ? - How To Improve Self Confidence In Hindi

आत्मविश्वास कैसे बढाएं

Keise badhaye self confidence ya aatmvishwash ko

1. स्वंय पर विश्वास रखें (Believe in Yourself), लक्ष्य बनायें (Make SMART goals) एंव उन्हें पूरा करने के लिए वचनबद्ध रहें | जब आप अपने द्वारा बनाये गए लक्ष्य (Goals) को पूरा करते है तो यह आपके आत्मविश्वास (Self Confidence) को कई गुना बढ़ा देता है |

2. ऐसे लक्ष्य (S.M.A.R.T. Goal) बनाएँ जिसे आप प्राप्त कर सकें (Achievable and Realistic Goals)| क्योंकि जब आप ऐसे लक्ष्य (TARGET) बनाते है जिसे आप पूरा नहीं कर सकते तो यह आपके self confidence (Aatmvishwash) को गिरा देते है और आपका स्वंय पर विश्वास कम हो जाता है | लक्ष्य S.M.A.R.T. होना चाहिए- Specific (स्पष्ट)
– Measurable (मापां जा सकने योग्य) – Achievable (प्राप्त किया जा सके), – Realistic (वास्तविक) -Time-Bound (निर्धारित समय सीमा में पूरा होने लायक)

3. खुश रहें (Be Happy), खुद को प्रेरित करें (Motivate Yourself), असफलता (Failure) से दुखी न होकर उससे सीख लें क्योंकि “experience हमेशा bad experience से ही आता है”

4. हमेशा आसान काम पहले करें और मुश्किल काम बाद में| क्योंकि जब आप पहले आसान कार्य अच्छे से कर लेते है तो दबाव कम हो जाता है और confidence बढ़ता है जिससे मुश्किल कार्य भी आसान बन जाता है |

5. सकारात्मक सोचें (Think Positive) , विनम्र रहें एंव दिन की शुरुआत किसी अच्छे कार्य से करें (starting the day with a positive attitude)|

6. इस दुनिया में नामुनकिन कुछ भी नहीं है – Nothing is Impossible in this world | आत्मविश्वास का सबसे बड़ा दुशमन किसी भी कार्य को करने में असफलता होने का “डर” (Fear of Failure) है एंव डर को हटाना है तो वह कार्य अवश्य करें जिसमें आपको डर लगता है |

7. आप यह मत सोचिये कि लोग आपके बारे में क्या सोचेंगे :- “सबसे बड़ा यही रोग क्या कहेंगे लोग (Sabse bada rog kya kahenge log)| ज्यादातर लोग कोई भी कार्य करने से पहले कई बार यह सोचते है की वह कार्य करने से लोग उनके बारे में क्या सोचेंगे या क्या कहेंगे और इसलिए वे कोई निर्णय ले ही नहीं पाते एंव सोचते ही रह जाते है एंव समय उनके हाथ से पानी की तरह निकल जाता है| ऐसे लोग हमेशा डर-डर के जीते है और बाद में पछताते हैं | इसलिए दोस्तों ज्यादा मत सोचिये जो आपको सही लगे वह कीजिये क्योंकि शायद ही कोई ऐसा कार्य होगा जो सभी लोगों को एक साथ पसंद आये |

8. सच बोलें, ईमानदार रहें, धूम्रपान न करें, प्रकृति से जुड़े, अच्छे (Good) कार्य करें , जरुरतमंद की मदद करें (Be Helpful)| क्योंकि ऐसे कार्य आपको सकारात्मक शक्ति (positive power) देते हैं वही दूसरी ओर गलत कार्य एंव बुरी आदतें (Bad Habits) हमारे आत्मविश्वास को गिरा देते हैं |

9. वह कार्य करें जिसमें आपकी रुचि हो एंव कोशिश करें कि अपने करियर (Career) को उसी दिशा में आगे ले जिसमें आपकी रुचि हो |

10. अच्छे दिखिए और अपना Dressing Sense Improve कीजिये | दूसरों की देखा-देखी मत कीजिए, वह पहनिए जो आपको comfortable लगे| कपड़े कम खरीदिये लेकिन अच्छे खरीदिये |

11. व्यवहारकुशल बनें और हमेशा नम्रता व मुस्कराहट (Smile) के साथ व्यवहार करें | इससे न केवल आपका आत्मविश्वास (Self Confidence) बढेगा बल्कि इससे आपके अच्छे मित्रों की संख्या भी बढ़ेगी | अच्छे मित्र हमेशा मदद करने के लिए तैयार रहते है और आपके सुख दुःख में हमेशा आपके साथ होते है |

12. Motivational Seminars में हिस्सा लें, ऐसे Television Program या videos देखें जो आपको inspire or motivate करे, Self Improvement and Personal Development की किताबे एंव प्रेरणादायक लेख (Motivational Articles) पढ़े| ऐसे प्रेरणादायक लेख (Motivational Articles) एंव किताबें हमारे mind को recharge कर देती है |

13. वर्तमान में जियें (Live in Present) क्योंकि न तो भूतकाल एंव न ही भविष्यकाल पर हमारा नियंत्रण है |

14. सकारात्मक सोचें (Think Positive), अच्छे मित्र बनायें (Make Good Friends), बच्चों से दोस्तीं करें और आत्मचिंतन करें |

15. Meditation (ध्यान), योग (Yoga) एंव प्राणायाम (pranayam) करें| अपने लिए समय निकालें और कुछ समय एकांत में बिताएं| स्वंय से बात करें (Talk to Yourself) और यह Feel (महसूस) करें कि आप एक बेहतर इन्सान है |

16. अपनी सफलताओं को याद करें और visualize (कल्पना) करें कि आप कुछ भी कर सकते है (You can do anything) और आपके लिए नामुकिन कुछ भी नहीं (Nothing is Impossible for You)|

17. हमेशा चिंतामुक्त (Tension Free) रहने की आदत बनायें, रचनात्मक तरीके से सोचें (Creative Thinking) और कुछ न कुछ नया करते रहें (Do Something New and Creative)| दिन में कुछ समय संगीत सुनने, खेलने अथवा रचनात्मक कार्यों के लिए जरूर निकालें (Do something different)|

18. आत्मनिर्भर बनें एंव जितना हो सके अपने कार्य स्वंय करने की कोशिश करें | आत्मनिर्भरता से आपका confidence लेवल बढ़ता है |

19. या तो ऐसे कार्य न करें जिसमे आपका interest नहीं और और आप अपना 100% नहीं दे सकते या फिर इन कार्यों में अपना interest बनाएं और Best करें | क्योंकि जब आप बिना interest के कोई काम करते है तो आप का confidence level गिरता है |

20. उस बारे में सोचना बंद कर दें जिस पर हमारा नियंत्रण न हो, अगर आप उस बातों या परिस्थियों की वजह से दुखी हो जाते है जो आपके नियंत्रण में नहीं है तो इसका परिणाम समय की बर्बादी व भविष्य पछतावा है जिससे आपका self confidence गिरता है |

21. दृढ निश्चय (Commitment) :- आप अपने लक्ष्य के प्रति अडिग रहें और अपना 100% दें | मेहनत व लगन से बड़े से बड़ा मुश्किल कार्य आसान हो जाता है | अगर लक्ष्य को प्राप्त करना है तो बीच में आने वाली बाधाओं को पार करना होगा, मेहनत करनी होगी, बार बार दृढ़ निश्चय से कोशिश करनी होगी |
अगर आपको सफल होना है तो अपने लक्ष्य पूरे करने की आदत बनाईये न कि उन्हें बार बार बदलने की| अगर आपका अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ निश्चय नहीं है तो आपके confidence का गिरना तय है |

क्या है पर्सनैलिटी डेवलपमैंट के मायने : Personality Development

Personality या व्यक्तित्व शब्द से हम सब भली प्रकार से परिचित हैं. इस शब्द का प्रयोग हम अपने जीवन में किसी भी व्यक्ति के गुण या attributes के रूप में करते हैं. अकसर ही हम ये कहते हुए पाए जाते हैं कि उस व्यक्ति की personality बहुत अच्छी है या “क्या पर्सनालिटी है!”.
पर क्या सही मायनो में हम इस शब्द के व्यापक रूप को समझ पाए हैं . Personality को अकसर लोग शारीरिक आकर्षण या सुंदरता से जोड़ कर देखते हैं पर इस शब्द के व्यापक रूप को हम समझ नहीं पाए हैं . Personality शब्द एक Latin शब्द Persona से derive हुआ है जिसका अर्थ होता है mask ; जिसका उपयोग रोमन लोग थियेटर में काम करने के लिए और अलग-अलग किरदार निभाने के लिए करते थे. इसका अर्थ तो ये हुआ की personality वही है जैसा हम दिखते हैं या दूसरों को नज़र आते हैं. पर ये personality की बहुत ही संकुचित परिभाषा हुई –
पर्सनॅलिटी सिर्फ़ शारीरिक गुणों से ही नही बल्कि विचारों और व्यवहार से भी मिल कर बनती है जो हमारे व्यवहार और समाज में हमारे समायोजन को भी निर्धारित करती है . कोई भी व्यक्ति जन्मजात अच्छी personality ले कर पैदा नही होता है बल्कि सफल होने लिए अपने अंदर गुणों को विकसित करना पड़ता है. ऐसे गुणों को जो दूसरों को प्रभावित करे साथ ही साथ अपने आपको भी develop करे.
शारीरिक रूप से सुंदर होना या intelligent होना व्यक्तित्व का सिर्फ़ एक ही पहलू हैं बल्कि अच्छी personality के लिए ज्ञान का सही उपयोग करना और अपने gestures और posture को उसके अनुरूप बनाना आवश्यक होता है.
अपने व्यक्तित्व को निखारने के लिए पहली आवश्यकता है सही perception क्योकि आप वही देखते हैं जो आप देखना चाहते हैं ‘ we see the things through our mind not through our eyes”, अपने negative emotions से दूर रहना और inferiority complex को दूर करना. ऐसा बिल्कुल भी नही है कि अगर आप physically attractive नही है तो आप की personality अच्छी नही है- मार्टिन लूथर किंग, गाँधी जी , इत्यादि शारीरिक रूप से attractive नही थे पर मानव जाती के लिए इनका व्यक्तित्व एक मिसाल है. क्योकि इन लोगो ने अपने negative emotions पर पर विजय पाई और खुद पर भरोसा किया. Negative emotions पर विजय पाने का उपाय है love yourself, feel good about yourself and make realistic life goals.
अपने साथियों से बेहतर बनने की बजाए कोशिश करे की अपने आप से बेहतर बने. Stress और fear दो बहुत ही बड़े कारण है जो हमारी personality को पूरी तरह से निखरने नही देते , अपने अंदर के डर को पहचानना और उससे मुक्त होने का प्रयास करना अत्यंत आवश्यक है. सबसे बड़ा डर जो किसी भी व्यक्ति के मन में होता है वो है fear of failure जिसे बार बार प्रयास कर के ही दूर किया जा सकता है. Positive attitude, self confidence, self motivation और अच्छी body language का इस्तेमाल कर के अपनी personality को develop किया जा सकता है.
व्यक्तित्व में विचारो और व्यवहारो की भूमिका के साथ साथ physical characteristics को नकारा नही जा सकता . Physical characteristics से अर्थ खूबसूरत चेहरे का नही बल्कि high level of energy, personal hygiene की और activeness से है साथ ही साथ सही manners, how to speak and treat others की knowledge होना अत्यंत आवश्यक है. हमारी personality का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा हमारे personal relationship हैं. किसी व्यक्ति का व्यक्तित्व इस बात से भी आँका जा सकता है कि वो अपने personal relationships को किस प्रकार manage करता है या उसमे कितना सफल रहा है.
विक्खयात physiologist Hippocrates ने सबसे पहले पर्सनॅलिटी को चार भाग में बांटा था

SANGUINE,
MELANCHOLIC,
PHLEGMATIC,
CHOLERIC.

उनका मानना था कि Sanguine लोगो में blood की मात्रा अधिक होती है तथा ये खुश रहते हैं और दूसरों को भी खुश रखते हैं तथा ज़्यादा सोच विचार नही करते, melancholic बहुत ही systematic और logical होते है हर चीज़ को सोच समझ के चलते है, phlegmatic लोग शांत प्रवृत्ति के होते है किसी भी बात पर वे अधिक उत्तेजित नही होते और choleric गुस्से वाले होते हैं उनके अंदर leadership quality भी अधिक होती है जिसके कारण वे दूसरों को dominate करते है. इससे आप अंदाज़ा लगा ही सकते हैं कि हर तरह के पर्सनॅलिटी की अपने ही विशेषता है और इस दुनिया में इन चारो प्रकारो की आवश्यकता है ताकि संतुलन बना रहे. हम सब में ये चारो traits या personality होती हैं पर किसी में कोई गुण ज़्यादा है तो किसी में कोई और ये सब शारीरिक गुणों के कारण नही है बल्कि हमारी स्वाभाविक प्रवित्ती के कारण है. हमे एक दूसरे की पर्सनॅलिटी को पहचानना है और उसके हिसाब से adjustment करना है. मान लीजिए की आप sanguine है तो ज़रूरी नही कि आपका साथी भी sanguine हो, हो सकता है की वो melancholic हो या choleric हो बल्कि अगर आप sanguine हैं तो हो सकता है की आप अपने चंचल स्वाभाव के कारण समझदारी से decision ना ले पाए ऐसे में कोई melancholic personality वाला आपको बेहतर गाइड कर सकता है.
हमे सामने वाले की personality को भाँपते हुए react करना चाहिए क्योंकि हर व्यक्ति इस दुनिया में unique है. हमे हर प्रकार के व्यक्तित्व की respect करनी चाहिए और अपनी personality develop करने का निरंतर प्रयास करना चाहिए, क्योंकि ” personality is to human as fragrance is to flower .”

दोस्तों जीवन (Life) में हमारे पास अपने लिए मात्र 3500 दिन (9 वर्ष व 6 महीने) ही होते है !
वर्ल्ड बैंक ने एक इन्सान की औसत आयु 78 वर्ष मानकर यह आकलन किया है जिसके अनुसार हमारे पास अपने लिए मात्र 9 वर्ष व 6 महीने ही होते है | इस आकलन के अनुसार औसतन 29 वर्ष सोने में, 3-4 वर्ष शिक्षा में, 10-12 वर्ष रोजगार में, 9-10 वर्ष मनोरंजन में, 15-18 वर्ष अन्य रोजमरा के कामों में जैसे खाना पीना, यात्रा, नित्य कर्म, घर के काम इत्यादि में खर्च हो जाते है | इस तरह हमारे पास अपने सपनों (Dreams) को पूरा करने व कुछ कर दिखाने के लिए मात्र 3500 दिन अथवा 84,000 घंटे ही होते है |


“संसार की सबसे मूल्यवान वस्तु समय ही है”

लेकिन वर्तमान में ज्यादातर लोग निराशामय जिंदगी (Life) जी रहे है और वे इंतजार कर रहे होते है कि उनके जीवन में कोई चमत्कार होगा, जो उनकी निराशामय जिंदगी को बदल देगा| दोस्तों वह चमत्कार आज व अभी से शुरू होगा और उस चमत्कार को करने वाले व्यक्ति आप ही है, क्योंकि उस चमत्कार को आप के अलावा कोई दूसरा व्यक्ति नहीं कर सकता | इस शुरुआत के लिए हमें अपनी सोच व मान्यताओ (beliefs) को बदलना होगा |

जीवन के नियम :-

दोस्तों हम एक नयी शुरुआत करने जा रहे है और इसके लिए हमें कुछ नियमो का पालन करना होगा | ये नियम आपकी जिंदगी बदल देंगे |

आत्मविश्वास (Self Confidence) :-

आत्मविश्वास से आशय “स्वंय पर विश्वास एंव नियंत्रण” (Believe in Yourself) से है | दोस्तों हमारे जीवन में आत्मविश्वास (Self Confidence) का होना उतना ही आवश्यक है जितना किसी फूल (Flower) में खुशबू (सुगंध) का होना, आत्मविश्वास (Self Confidence) के बगैर हमारी जिंदगी एक जिन्दा लाश के समान हो जाती है | कोई भी व्यक्ति कितना भी प्रतिभाशाली क्यों न हो वह आत्मविश्वास के बिना कुछ नहीं कर सकता | आत्मविश्वास ही सफलता (Success) की नींव है, आत्मविश्वास की कमी के कारण व्यक्ति अपने द्वारा किये गए कार्य पर संदेह करता है | आत्मविश्वास (Self Confidence) उसी व्यक्ति के पास होता है जो स्वंय से संतुष्ट होता है एंव जिसके पास दृड़ निश्चय, मेहनत (Hardwork) व लगन (Focused), साहस (Fearless ) , वचनबद्धता (Commitment) आदि संस्कारों की सम्पति होती है |

आत्मविश्वास कैसे बढाएं:

1. स्वंय पर विश्वास रखें (Believe in Yourself), लक्ष्य बनायें (make smart goals) एंव उन्हें पूरा करने के लिए वचनबद्ध रहें | जब आप अपने द्वारा बनाये गए लक्ष्य (Goals) को पूरा करते है तो यह आपके आत्मविश्वास (Self Confidence) को कई गुना बढ़ा देता है |
2. खुश रहें (Be Happy), खुद को प्रेरित करें (Motivate Yourself), असफलता (Failure) से दुखी न होकर उससे सीख लें क्योंकि “experience हमेशा bad experience से ही आता है”
3. सकारात्मक सोचें (Think Positive) , विनम्र रहें एंव दिन की शुरुआत किसी अच्छे कार्य से करें (starting the day with a positive attitude)|
4. इस दुनिया में नामुनकिन कुछ भी नहीं है | आत्मविश्वास का सबसे बड़ा दुशमन किसी भी कार्य को करने में असफलता होने का “डर” (Fear of Failure) है एंव डर को हटाना है तो वह कार्य अवश्य करें जिसमें आपको डर लगता है |
5. सच बोलें, ईमानदार रहें, धूम्रपान न करें, प्रकृति से जुड़े, अच्छे (Good) कार्य करें , जरुरतमंद की मदद करें (Be Helpful)| क्योंकि ऐसे कार्य आपको सकारात्मक शक्ति (positive power) देते हैं वही दूसरी ओर गलत कार्य एंव बुरी आदतें (Bad Habits) हमारे आत्मविश्वास को गिरा देते हैं |
6. वह कार्य करें जिसमें आपकी रुचि हो एंव कोशिश करें कि अपने करियर (Career) को उसी दिशा में आगे ले जिसमें आपकी रुचि हो |
7. वर्तमान में जियें (Live in Present) , सकारात्मक सोचें (Think Positive), अच्छे मित्र बनायें, बच्चों से दोस्तीं करें, आत्मचिंतन करें |

2. स्वतंत्रता (Independence):-

स्वतंत्रता का अर्थ स्वतन्त्र सोच एंव आत्मनिर्भरता से हैं |
“हमारी खुशियों का सबसे बड़ा दुश्मन निर्भरता (Dependency) ही है एंव वर्तमान में खुशियाँ कम होने का कारण निर्भरता का बढ़ना ही है”
“सबसे बड़ा यही रोग क्या कहेंगे लोग”:- ज्यादातर लोग कोई भी कार्य करने से पहले कई बार यह सोचते है की वह कार्य करने से लोग उनके बारे में क्या सोचेंगे या क्या कहेंगे और इसलिए वे कोई निर्णय ले ही नहीं पाते एंव सोचते ही रह जाते है एंव समय उनके हाथ से पानी की तरह निकल जाता है | ऐसे लोग बाद में पछताते हैं| इसलिए दोस्तों ज्यादा मत सोचिये जो आपको सही लगे वह कीजिये क्योंकि शायद ही कोई ऐसा कार्य होगा जो सभी लोगों को एक साथ पसंद आये |
अपनी ख़ुशी को खुद नियंत्रण (control) कीजिये:- वर्तमान में ज्यादातर लोगों की खुशियाँ (Happiness) परिस्थितियों पर निर्भर हैं| ऐसे लोग अनुकूल परिस्थिति में खुश (Happy) एंव प्रतिकूल परिस्थियों में दुखी (Sad) हो जाते है | उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति का कोई काम बन जाता है तो वह खुश (Happy) एंव काम न बनने पर वह दुखी हो जाता है | दोस्तों हर परिस्थिति में खुश रहें क्योंकि प्रयास करना हमारे हाथ में है लेकिन परिणाम अथवा परिस्थिति हमारे हाथ में नहीं है | परिस्थिति अनुकूल या प्रतिकूल कैसी भी हो सकती है लेकिन उसका response अच्छा ही होना चाहिए क्योंकि response करना हमारे हाथ में है |
आत्मनिर्भर बनें:- दोस्तों निर्भरता ही खुशियों की दुशमन है इसलिए जहाँ तक हो सके दूसरों से अपेक्षाओं कम करें, अपना कार्य स्वंय करें एंव स्वालंबन अपनाएं दूसरों के कर्मों या विचारों से दुखी नहीं होना चाहिए क्योंकि दूसरों के विचार या हमारे नियंत्रण में नहीं है |
“अगर आप उस बातों या परिस्थियों की वजह से दुखी हो जाते है जो आपके नियंत्रण में नहीं है तो इसका परिणाम समय की बर्बादी व भविष्य पछतावा है”

3 वर्तमान में जिएं (Live in Present):-

दोस्तों हमें दिन में 70,000 से 90,000 विचार (thoughts) आते है और हमारी सफलता एंव असफलता इसी विचारों की quality (गुणवता) पर निर्भर करती हैं| वैज्ञानिकों के अनुसार ज्यादातर लोगों का 70% से 90% तक समय भूतकाल, भविष्यकाल एंव व्यर्थ की बातें सोचने में चला जाता है | भूतकाल हमें अनुभव देता है एंव भविष्यकाल के लिए हमें planning (योजना) करनी होती है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं की हम अपना सारा समय इसी में खर्च कर दें| दोस्तों हमें वर्तमान में ही रहना चाहिए और इसे best बनाना चाहिए क्योंकि न तो भूतकाल एंव न ही भविष्यकाल पर हमारा नियंत्रण है |
अगर खुश रहना है एंव सफल होना है तो उस बारे में सोचना बंद कर दें जिस पर हमारा नियंत्रण न हो”

4. मेहनत एंव लगन (Hard work and Focus ):-

दोस्तों किसी विद्वान् ने कहा है की कामयाबी, मेहनत से पहले केवल शब्दकोष में ही मिल सकती है | मेहनत (Hard Work) का अर्थ केवल शारीरिक काम से नहीं है, मेहनत शारीरिक व मानसिक दोनों प्रकार से हो सकती है | अनुभव यह कहता है की मानसिक मेहनत, शारीरिक मेहनत से ज्यादा मूल्यवान होती है |
कुछ लोग लक्ष्य (Target) तो बहुत बड़ा बना देते है लेकिन मेहनत नहीं करते और फिर अपने अपने लक्ष्य को बदलते रहते है | ऐसे लोग केवल योजना(planning) बनाते रह जाते है |
मेहनत व लगन से बड़े से बड़ा मुश्किल कार्य आसान हो जाता है | अगर लक्ष्य को प्राप्त करना है तो बीच में आने वाली बाधाओं को पार करना होगा, मेहनत करनी होगी, बार बार दृढ़ निश्चय से कोशिश करनी होगी |
“असफल लोगों के पास बचने का एकमात्र साधन यह होता है कि वे मुसीबत आने पर अपने लक्ष्य को बदल देते है |”
कुछ लोग ऐसे होते है जो मेहनत तो करते है लेकिन एक बार विफल होने पर निराश होकर कार्य को बीच में ही छोड़ देते है इसलिए मेहनत के साथ साथ लगन व दृढ़ निश्चय (Commitment) का होना भी अति आवश्यक है |
“अगर कोई व्यक्ति बार बार उस कार्य को करने पर भी सफल नहीं हो पा रहा तो इसका मतलब उसका कार्य करने का तरीका गलत है एंव उसे मानसिक मेहनत करने की आवश्यकता है |”

5. व्यवहारकुशलता:-

व्यवहारकुशल व्यक्ति जहाँ भी जाए वह वहां के वातावरण को खुशियों से भर देता है ऐसे लोगों को समाज सम्मान की दृष्टी से देखा जाता है | ऐसे लोग नम्रता व मुस्कराहट (Smile) के साथ व्यवहार करते है एंव हमेशा मदद करने के लिए तैयार रहते है | शिष्टाचार ही सबसे उत्तम सुन्दरता है जिसके बिना व्यक्ति केवल स्वयं तक सीमित हो जाता है एंव समाज उसे “स्वार्थी” नाम का अवार्ड देता है |
“जब आपके मित्रों की संख्या बढने लगे तो यह समझ लीजिये कि आप ने व्यवहारकुशलता का जादू सीख लिया है |”
शिष्टाचारी व्यक्ति किसी भी क्षेत्र भी जाए वहा उनके मित्र बन जाते है जो उसके लिए जरुरत पड़ने पर मर मिटने के लिए तैयार रहते है |
चरित्र व्यवहारकुशलता की नींव है एंव चरित्रहीन व्यक्ति कभी भी शिष्टाचारी नहीं बन सकता| चरित्र, व्यक्ति की परछाई होती है एंव समाज में व्यक्ति को चहरे से नहीं बल्कि चरित्र से पहचाना जाता है | चरित्र का निर्माण नैतिक मूल्यों, संस्कारों, शिक्षा एंव आदतों से होता है |
व्यवहारकुशल व्यक्तियों की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है की वह हमेशा मदद के लिए तैयार रहते है |
वर्तालाप दक्षता, व्यवहारकुशलता का महत्वपूर्ण हिस्सा है | वाणी में वह शक्ति है जो वातावरण में मिठास घोल कर उसे खुशियों से भर सकती है या उसमे चिंगारी लगा कर आग भड़का सकती है |
“words can change the world” (शब्द संसार बदल सकते है |)
सोच समझ कर बोलना, कम शब्दों में ज्यादा बात कहना, व्यर्थ की बातें न करना, अच्छाई खोजना, तारीफ़ करना, दुसरे की बात को सुनना एंव महत्त्व देना, विनम्र रहना, गलतियाँ स्वीकारना इत्यादि वार्तालाप के कुछ basic नियम है |

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