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नमस्कार दोस्तों मैं एक हिमाचली ब्लॉगर (Himachali Blogger) हुं और मैंने अपनी बलौग इसलिये बनाई है ताकि हिंन्दी भाषा का प्रचार कर सकं ताकि सभी हिन्दी भाषा में ब्लॉगिंग करें व हिन्दी को अपना गौरव मान मर्यादा माने। www.imdishu.com हिमाचल में इकलौती एैसी Blog/Website है जो नियमित पोस्ट करती है व नया लाती है तोकि हमारे हिमाचली भाई व समस्त भारतीय कुछ अच्छा पढ़ सके। जय हिंद जय भारत। #Imdishu #Hindi Blogs

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23/07/2017

हम मुसाफिर है यारों आज यहां तो कल वहां : गद्दी - Gaddi

Posted by : #PanwerDishu

क्या आपने कभी गद्दी शब्द सुना है ?अगर नहीं सुना तो आपके लिये ये पोस्ट बेहतर है जरा गौर से पढ़ना। गद्दी हिमाचल का सबसे महत्वपुर्ण हिस्सा रहे हैं। ये दिन रात जंगलों व पहाड़ों में घुमकर पशुओं को चराते हैं और अपनी जिंदगी पशुओं के साथ ही व्यतित करते हैं। ज़रा ठहरिये। इन्हे आदिवासी व जंगली समझने की भूल मत करना क्योंकि ये उच्च वर्ग के लोग है जिनके पास शायद आपसे भी ज्यादा संम्पत्ति होगी। बस ये तो इनका काम है , जगह - जगह पशुओं को ले जाना और एक खास बात तो यह है कि गद्दी की पहचान पुरे हिमाचल में होती है अगर आप किसी गद्दी को जानते हैं तो उससे हिमाचल के किसी भी क्षेत्र के बारे में पुछ लेना वो बिना सोचे ही आपको सारी जानकारी दे देगा क्योंकि इन्हे पुरे हिमाचल का पता रहता है। तो चलिये जानते हैं गद्दियों के बारे में कुछ दिल्चस्प बातें। #डिअर_जिंदगी

गद्दी कौन होते हैं ? Who Are Gaddies In Hindi)
हिमाचल के घूमंतू चरवाहों को गद्दी कहते हैं जो भेड़ - बकरियां पालते हैं और मौसम के आधार पर अपना ठिकाना बदलते रहते हैं। गद्दी , खासकर कुल्लु में पाये जाते हैं कुल्लु को लोग अधिक पशु पालते हैं और मुसाफिर बन जाते हैं।

इन लोगों के पास अपने बड़े बड़े घर तो होते हैं मगर इन्हें अपने काम से प्यार है और आजीवन घुमंतु की जिंदगी व्यतित करते हैं। साल में एक - आध बार घर चले जाते हैं और बाकि महीनों में जंगल और पहाड़ों पर ही रहते हैं।

नये क्षेत्रों में तालमेल 
गद्दी लोग बड़े सीधे - साधे लोग होते हैं ये किसी को नुकसान नहीं पहूंचाते , ये जहां भी जाते हैं वहां अपनी मस्ती में जाते हैं और सबके दिलों में छा जाते हैं। लोगों से इनका तालमेल जल्दी बन जाता है। नये गांव में जाने के बाद , वहां के लोग इन गद्दियों के पास अपने पशुओं को भी भेज देते हैं और गद्दी उनके पशुओं को एक - दो महीने तक पालते हैं , जहां भी जाते हैं अपने साथ ले जाते हैं और देखभाल करते हैं और समय पर वापिस दे देते हैं इससे लोगों के पशु तगड़े और स्वस्थ रहते हैं और वो गद्दियों को इसके बदले में थोड़े पैसे भी दे देते हैं जिससे इनकी आमदनी भी हो जाती है।

रब्ब रखवाला , शेरों का ड़र नहीं 
गद्दियों का कहना है कि जब वो जंगल में जाते हैं तो उन्हे कई दफ़ा शेर व भालू , बाघ आदि जानवर भी मिल जाते हैं लेकिन हम नहीं ड़रते क्योंकि हम उन्हे नुकसान नहीं पहूंचाते तो वो भी हमें नुकसान नहीं पहूंचा सकते है।

वैसे तो गर्मी के मौसम में शेर उपरी हिमाचल में चले जाते हैं जिससे इन्हे शेरों का ख़तरा नहीं रहता , मगर बाघ और भालू से कई बार सामना हो जाता है। और अगर ध्यान ना दिया जाये तो बाघ भेड़ों व बकरियों को खा भी जाते हैं। गद्दी लोग अपने पशुओं को डंगर बोलते हैं

जंगल में गुज़ारा 
गद्दी दिल के भोले होते हैं जहां जाते हैं फिट हो जाते हैं , हमेशा जंगल मे रहते हैं और सुखी लकड़ियों का उपयोग करके खाना बनाते है और इनके पास घर तो नहीं होता लेकिन अपना वाटरप्रुफ टैंट होता है जिससे वे टैंट बना लेते हैं और इस घर को गद्दी डेरा कहते हैं। और आराम से जीना कोई इनसे सीखे।

परदेसियों से प्रेम 
एक बार मैं बिलिंग जा रहा था तो रास्ते में एक गद्दी मिल गया, मैंने पुछा चाचा बिंलिंग में खाने पीने का कोई जुगाड़ है क्या ? तो वो बोले कि खाने पीने का जुगाड़ तो मुश्किल है और वापिस जाने के लिये किसी गाड़ी का मिलना भी मुश्किल है , लेकिन अगर ना मिले तो वो देखो वहां हमारा डेरा है वहीं पर चले आना और मज़े से खा-पीकर सुबह चलो जाना। मैं इस बात से बहुत प्रभावित हुआ वैसे वापिस आते समय एैसी कोई परेशानी तो नहीं आई पर मेरे दिल में इनके लिये प्रेम जाग उठा था। ये वाकई में अच्छे इन्सान होते है।

तो दोस्तों इस लेख से आप सभी समझ गये होंगे कि गद्दी कौन होते हैं और अपना जीवन कैसे बिताते हैं। अगर आप हमारी वेबसाइट पर कुछ पोस्ट करना चाहते हैं तो हमे ई-मेल करें हमारी ई-मेल आईडी है Panwerdishu@gmail.com

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