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नमस्कार दोस्तों मैं एक हिमाचली ब्लॉगर (Himachali Blogger) हुं और मैंने अपनी बलौग इसलिये बनाई है ताकि हिंन्दी भाषा का प्रचार कर सकं ताकि सभी हिन्दी भाषा में ब्लॉगिंग करें व हिन्दी को अपना गौरव मान मर्यादा माने। www.imdishu.com हिमाचल में इकलौती एैसी Blog/Website है जो नियमित पोस्ट करती है व नया लाती है तोकि हमारे हिमाचली भाई व समस्त भारतीय कुछ अच्छा पढ़ सके। जय हिंद जय भारत। #Imdishu #Hindi Blogs

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20/07/2017

HTML क्या है ? History , Types , Learn In Hindi

हैल्लो फ्रैंडस , आज का टॉपिक है, HTML क्या है ? HTML का इतिहास क्या है ? और HTML के फायदे और नुकसान क्या क्या है..? 

दोस्तो हमारे दोस्तों में , हम में , एंव हमारे आस पास के लोगों में ये इच्छा होती है कि यार कैसे भी प्रोगरैमिंग सिखनी है। और प्रोगरैमिंग की पहली सीढ़ी है HTML. क्योंकि इसे सिखना आसान है और इसको कई सारे फायदे हैं , इसके बाद आप किसी अन्य प्रोगरैमिंग भाषा को सीख सकते हैं।

तो आज मैं आप को बताने वाला हूं कि एच टी एम एल का क्या मतलब होता है और इसके क्या फायदे व नुकसान है ? और साथ ही मैं आपको इसका इतिहास भी बताने वाला हूं आशा करता हूं आपको ये आर्टिकल पसंद आयेगा। तो चलिये करते है शुरुआत।

एच टी एम एल क्या है.? ( what is HTML in hindi ) : 
HTML का पुरा मतलब Hyper Text Markup Language है Hyper Text का मतलब Links है और Hyperlinks का मतलब है एक वेब पेज़ से अन्य पेज़ों को जोड़ना। HTML एक Markup Tags का समुह है , जिनके प्रयोग से HTML Documents तैयार किये जाते हैं। यानि HTML का प्रयोग वेब पेज़ बनाने के लिये किया जाता है।

एच टी एम एल का इतिहास : History Of HTML In Hindi : 
HTML कोई स्थिर भाषा नहीं है यह बदलती रहती है जैसे किसी सॉफ्टवेअर का नया वर्जन आता है इसी प्रकार एच टी एम एल के भी नये वर्जन आते रहते हैं। निचे पढ़ें :

HTML 1.0 
यह एच टी एम एल का पहला वर्जन था यानि HTML भाषा को पहली बार बनाया गया था। HTML का आविष्कार "सर टिम बैनर्स ली" ने सन् 1991 में किया था। उन्होने एक डॉक्युमेंट बनाया था जिसपर HTML के कोड़ लिखे थे बाद में इन कोड़्स का प्रयोग वेब पेज़ बनाने के लिये किया गया।

HTML 2.0 
यह वर्जन सन् 1997 में आया , इसमें वो सभी पुराने कोड़ (Tags) भी शामिल थे लेकिन इसमें नये कोड़ भी जोड़े गये थे। जिसकी वजह से सब को बहुत फायदा मिला। और वेब पेज़ डिज़ाइन करने के लिये अच्छे फ़िचर प्राप्त हुए।

HTML 4.0 
यह वर्जन सन् 1998 , अप्रैल में आया , जिसने प्रोगरैंमिग भाषा में क्रांति लाने का काम किया। दिसंबर 1997 में W3C नें इसे बनाने पर विचार दिया था। और यह अप्रैल 1998 में बनकर तैयार हो गयी थी , इसको बाद सबसे पहले इसका प्रयोग Microsoft कंम्पनी को Browser - Internet Explorer में किया गया था।

XHTML 1.0
HTML 4.0 की अच्छी सफलता के बाद इसका भी आविष्कार किया गया , ये HTML का ही नया वर्जन था , लेकिन इसमें बेहतर फ़िचर शामिल किये गये थे। एक मायनें में यह 4.01 वर्जन था लेकिन इसमें XML ( Extensible Markup Language) को भी शामिल किया गया था तभी इसका नाम XHTML रखा गया। इससे वेब पेज़ बनाने के लिये बहुत आसानी साबित हुई और लोग इसे सिखने के लिये बेताब होने लगे।

HTML5 
यह पांचवा वर्जन था जिसे 28 अक्तुबर 2014 में अस्तित्व में लाया गया। अभी भी यही वर्जन है , हम सभी HTML5 का ही प्रयोग कर रहे हैं। यह HTML भाषा में सबसे बड़ी क्रांति का रुप माना जाता है आज की बात करें तो हर दुसरे इन्सान को HTML5 का बेहतर ज्ञान प्राप्त है।

तो ये था HTML का इतिहास और अब बारी आती है HTML के फायदे एंव नुकसान जानने की।

एच टी एम एल के फायदे : Benefits Of HTML In Hindi : 
1. यह इस्तेमाल करने में बहुत आसान है। जबकि अन्य भाषाओं को सिखने में दिक्कत आती है।
2. लुज़ सिंन्टैक्स , यह बेहतर है क्योंकि अधिक फ्लैक्सिबल होना स्टैंडर्स के लिये अच्छा नहीं है।
3. लगभग सभी ब्राउज़र के द्वारा सपोर्ट किया जाता है। इससे ये फायदा होता है कि हमारा HTML Document या HTML से बना वेब पेज़ किसी भी ब्राउज़र में आसानी से दिख भी जाता है और उसका प्रयोग भी आसानी से किया जा सकता है।
4. यह XML के समान है , जो अधिकतर डाटा स्टोर करने के लिये प्रयोग किया जाता है।
5. फ्री , आपको किसी भी सॉफ्टवेअर को खरीदने की जरुरत नही पड़ती।
6. नये प्रोगरैमर्स (Newbie Programmers ) के लिये सिखने के लिये आसान है।

एच टी एम एल के नुकसान : Disadvantage Of HTML In Hindi : 
1. यह डायनामिक आउटपुट (Dynamic Output) को अकेले नहीं बना सकती, यानि सिर्फ HTML के प्रयोग से हम डायनामिक आउटपुट नहीं बना सकते।
2. HTML के लिये सुरक्षा के फ़िचर बहुत कम उपलब्ध होते है।
3. कभी कभार HTML से बने बड़े डॉक्युमेंट को देखने व समझने में दिक्कत आती है।

तो दोस्तो आज हमने आप को HTML के बारे में बताया , उम्मीद है आपको अच्छी जानकारी प्राप्त हुई हो। लेकिन अगर आपके मन में कोई प्रशन है तो कृपया कॉमेंट करके पुछिये। या आप अपना सवाल पुछने के लिये हमें ई-मेल भी कर सकते हैं हमारी ई-मेल आईडी है Panwerdishu@gmail.com.

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